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बगला हृदय मंत्र (अस्सी अक्षरी मंत्र)

“|| आं ह्ल्रीं क्रों ग्लौं हुँ ऐं क्लीं श्रीं ह्रीं बगलामुखि आवेशय आवेशय आं ह्ल्रीं क्रों ब्रह्मास्त्ररुपिणि एहि एहि आं ह्ल्रीं क्रों मम हृदये आवाहय आवाहय सान्निध्यं कुरु कुरु आं ह्ल्रीं क्रों ममैव हृदये चिरं तिष्ठ तिष्ठ आं ह्ल्रीं क्रों हुं फट् स्वाहा ||”

यह मंत्र बड़ा ही विलक्षण है, इसके समरण मात्र से अभीष्ट से अभीष्ट कार्य संपंदित हो जाते है, उसके लिए आवयश्क है कि इस मंत्र का चालीस हजार जप कर हवन, तर्पण, मार्जिन कर मंत्र के माध्यम से हम लोग माँ की निकटता प्राप्त करने का

इसे जागृत कर लिया जाय इस प्रत्यन करते है “ममैव हृदये चिरं तिष्ठ तिष्ठ” लगातार प्रयास से क्रमशः माँ की ज्योति हमारे

हृदय में कुछ ना कुछ मात्रा में आ ही जाती है लेकर बहुत ही भयानक व कठोर दंड देती है।

साधक का अहित सोचने वालो को माँ स्वयं संज्ञान

यदि ऐसी घटना हृदय मंत्र के पश्चयात होने लगे

तो समझ लेना माँ की ज्योति आप के हृदय तक पहुंच गयी है।

संकल्प :- भगवती माँ पीताम्बरा की प्रसन्नता के लिए मैं बगला हृदय मंत्र का दस हजार मंत्रो का जप करने का संकल्प कर रहा है।

दस हजार जप के पश्चयात बीज मंत्र के सामग्री से दस माले का हवन बामाचारी पद्धित से कर शराब से तर्पण और मार्जिन ही करे।

चूँकि कलियुग मे मंत्र जप चार गुना करते है अतः चार बार इसी प्रकार १०-१० हजार के और अनुष्ठान करने है।

लाभ :-

> बंध्या स्त्री पुत्रवती हो जाती है।

> मुकदमे में विजय देता है।

> सभी मनोवांछित कार्य होते है।

दरिद्रता नष्ट हो जाती है, धन का आवागमन प्रारम्भ हो जाता है।

> सभी लोग सफलता देख कर हक्के बक्के रह जाते है।

> १०८ बार इसी मंत्र से जल अभ्मंत्रित कर रोगी को पिलाने से रोगी रोग मुक्त हो जाता है।

|| जय माँ बगलामुखी ||

टी.डी. सिंह जी

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बगला गायत्री: माला की प्राण प्रतिष्ठा विधि

हल्दी की माला की प्राण प्रतिष्ठा विधि: प्रारंभिक तैयारी: पंचगव्य निर्माण विधि: उपरोक्त सभी को एक पात्र में मिलाकर अच्छी तरह से मिश्रण करें। फिर इस पंचगव्य में हल्दी की नई माला (या जिस माला को सिद्ध करना हो) डाल दें। मूल मंत्र जप: अब अपने दक्षिण हाथ की अंगुलियों से पात्र को ढककर निम्न मूल मंत्र का 108 बार जप करें: मूल मंत्र: ऊँ ह्ल्रीं बगलामुखि सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पंदं स्तम्भय जिह्वांम् कीलय बुद्धिं विनाशय ह्ल्रीं ऊँ स्वाहा । दूध में स्नान और अभिमंत्रण: अब उस माला को गाय के दूध में डालें और उसी मूलमंत्र से पुनः 108 बार जप करें। इसके बाद, गंगा जल से माला को धोएं — प्रत्येक बार धोते हुए 36 बार मूलमंत्र

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रुद्रयामल का बगला अष्टोत्तर शतनाम स्त्रोत

– माँ की कृपा विचित्र होती है – स्त्रोत पाठ हृदय की कातर पुकार के रूप में अभिव्यक्त हो तो आध्यात्मिक शक्तियाँ अपनी कृपा प्रदान करती ही है और पराम्बा शीघ्रतिशीघ्र द्रवित होती है। दुःखी व्यक्ति के हृदय से कातर पुकार निकलती ही है। शीघ्रता से गा कर पाठ न करें कहा गया है – रटंत विद्या फलन्त ना ही। यहा हमारा बारम्बार का अनुभव रहा है, बगला शतनाम स्त्रोत में आश्चर्यजनक शक्ति समाई हुई है। 1. ब्रम्ह्मास्त्र रूपिणी देवी 2.माता बगलामुखी । 3.चिच्छक्तिर्ज्ञानरूपा 4.ब्रम्ह्मानन्द प्रदायिनी ।। 1 ।। 5.महाविद्या 6.महालक्ष्मी 7.श्री मत्रिपुरसुन्दरी । 8.भुवनेशी 9.जगन्माता 10.पार्वती 11.सर्वमंगला ॥ 2 ॥ 12.ललिता 13. भैरवी 14. शान्ता 15. अन्नपूर्णा 16. कुलेश्वरी । 17.वाराही 18.छिन्नमस्ता 19.तारा 20.काली 21.सरस्वती ।। 3 ।। 22.

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🔱  जय माँ बगलामुखी  🔱