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जिन्न व ब्रह्म राक्षस को नष्ट करना

आज के समय में जब आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्तियों के प्रति आस्था बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कई लोग अलौकिक बाधाओं, जैसे कि जिन्न और ब्रह्म राक्षसों से पीड़ित भी हो रहे हैं। ये शक्तियाँ कभी-कभी किसी व्यक्ति के जीवन, परिवार, स्वास्थ्य और व्यापार को पूर्णतः नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में एक मजबूत आध्यात्मिक शरण और प्रभावशाली तांत्रिक उपाय ही इनसे रक्षा कर सकते हैं।

एक सच्चा अनुभव:

भुवनेश्वर से मेरे शिष्य ने बताया कि उसका सारा परिवार जिन्नों व ब्रह्म राक्षसों द्वारा पूर्णतः तबाह किया जा चुका है। इन शक्तियों ने उसकी दो बेटियों और पत्नी के साथ अनैतिक सम्बन्ध स्थापित किए, बेटे के कारोबार में निरंतर घाटा होता गया, और परिवार की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। उसने अनेकों उपाय किए, कई पाखंडी तांत्रिकों से संपर्क किया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। वह पूरी तरह से निराश और टूट चुका था। आत्महत्या जैसे विचार भी उसके मन में उठने लगे थे।

एक दिन, संयोगवश वह इंटरनेट पर कुछ जानकारी ढूंढ रहा था, तभी उसे एक अनुभव साझा करने वाला लेख मिला। जैसे-जैसे वह उस लेख को पढ़ता गया, उसके भीतर एक आशा की किरण जगने लगी। उसी क्षण रात के दो बजकर तीस मिनट पर उसने डॉ. तपेश्वरी दयाल सिंह को फोन कर दिया। यह उसका सौभाग्य था कि डॉ. साहब ने तुरन्त फोन उठा लिया। शिष्य ने अपनी सारी व्यथा उन्हें बताई। डॉ. साहब ने उसे आश्वस्त किया, “माँ पीताम्बरी की कृपा से सब ठीक होगा।”

मानसिक परिवर्तन:

रातभर वह शिष्य सो नहीं सका, वह लगातार घड़ी देखता रहा और माँ के चमत्कार की प्रतीक्षा करता रहा। अगले दिन उसने फिर डॉ. साहब को फोन लगाया, और उसे ‘बगला अष्टोत्तर शतनाम’ के 10,000 पाठ करने का निर्देश मिला। साथ ही डॉ. साहब ने कहा, “बाकी कार्य मैं देख लूंगा।”

उसने संकल्पपूर्वक वह पाठ आरम्भ किया और संपूर्ण किया। पाठ पूर्ण होते ही उसके जीवन की स्थिति पूरी तरह से परिवर्तित हो गई। परिवार में शांति लौटी, व्यापार दोबारा चलने लगा, और जिन अलौकिक शक्तियों का प्रभाव था, वे पूर्णतः समाप्त हो गईं। यह माँ बगलामुखी की कृपा और ब्रह्मास्त्र मंत्र की शक्ति का ही परिणाम था।

विशेष प्रयोग:

इस प्रकरण में शतनामों के पाठों की संख्या अधिक रखी गई। इसके दो कारण थे:

  1. ताकि यजमान का मन निरंतर साधना में लगा रहे और वह कष्टों से मानसिक रूप से मुक्त हो सके।
  2. माँ का जितना अधिक पाठ होगा, साधक को उतनी ही तीव्र शक्ति और माँ की कृपा प्राप्त होगी। इससे जो प्रयोग गुरुदेव ने किया, वह और अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुआ।

तांत्रिक प्रयोग की विधि:

बगला तंत्र के अंतर्गत “ब्रह्मास्त्र माला मंत्र” का नित्य 108 बार जप और हवन 30 दिनों तक लगातार किया गया। इस प्रयोग के दौरान यंत्र भी टूट गया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि दुष्ट शक्तियाँ यंत्र में समा कर नष्ट हो चुकी हैं। माँ बगलामुखी ने उस परिवार की रक्षा की और अब वह परिवार पूर्णतः सुरक्षित और सुखी जीवन जी रहा है।

ब्रह्मास्त्र माला मंत्र:

ॐ नमो भगवति चामुण्डे नरकंकगृधोलूक परिवार सहिते श्मशानप्रिये नररूधिर मांस चरू भोजन प्रिये सिद्ध विद्याधर वृन्द वन्दित चरणे ब्रहमेश विष्णु वरुण कुबेर भैरवी भैरवप्रिये इन्द्रक्रोध विनिर्गत शरीरे द्वादशादित्य चण्डप्रभे अस्थि मुण्ड कपाल मालाभरणे शीघ्रं दक्षिण दिशि आगच्छागच्छ मानय-मानय नुद- नुद अमुकं (अपने शत्रु का नाम लें) ……मारय मारय, चूर्णय- चूर्णय, आवेशयावेशय त्रुट- त्रुट, त्रोटय त्रोटय स्फुट-स्फुट स्फोटय-स्फोटय महाभूतान जृम्भय- जृम्भय ब्रह्मराक्षसान-उच्चाटयोच्चाटय भूत प्रेत पिशाचान् मूर्च्छय-मूर्च्छय मम शत्रून् उच्चाटयोच्चाटय शत्रून् चूर्णय- चूर्णय सत्यं कथय-कथय वृक्षेभ्यः सन्नाशय – सन्नाशय अर्क स्तम्भय-स्तम्भय गरुड़ पक्षपातेन विषं निर्विषं कुरू कुरू लीलांगालय वृक्षेभ्यः परिपातय-परिपातय शैलकाननमहीं मर्दय-मर्दय मुखं उत्पाटयोत्पाटय पात्रं पूरय-पूरय भूत भविष्यं तय्सर्वं कथय-कथय कृन्त कृन्त दह दह पच-पच मथ- मथ प्रमथ- प्रमथ घर्घर-घर्घर ग्रासय-ग्रासय विद्रावयविद्रावय उच्चाटयोच्चाटय विष्णु चक्रेण वरुण पाशेन इन्द्रवज्रेण ज्वरं नाशय नाशय प्रविदं स्फोटय-स्फोटय सर्व शत्रुन् मम वशं कुरु-कुरु पातालं पृत्यंतरिक्षं आकाशग्रहं आनयानय करालि विकरालि महाकालि रुद्रशक्ते पूर्व दिशं निरोधय-निरोधय पश्चिम दिशं स्तम्भय स्तम्भय दक्षिण दिशं निधय-निधय उत्तर दिशं बन्धय बन्धय ह्रां ह्रीं ॐ बंधय बंधय ज्वालामालिनी स्तम्भिनी मोहिनी मुकुट विचित्र कुण्डल नागादि वासुकी कृतहार भूषणे मेखला चन्द्रार्कहास प्रभंजने विद्युत्स्फुरित सकाश साट्टहासे निलय-निलय

हुं फट्-फट् विजृम्भित शरीरे सप्तद्वीपकृते ब्रह्माण्ड विस्तारित स्तनयुगले असिमुसल परशुतोमरक्षुरिपाशहलेषु वीरान शमय शमय सहस्रबाहु परापरादि शक्ति विष्णु शरीरे शंकर हृदयेश्वरी बगलामुखी सर्व दुष्टान् विनाशय विनाशय हुं फट् स्वाहा ।

ॐ ह्रीं बगलामुखि ये केचनापकारिणः सन्ति तेषां वाचं मुखं पदं स्तम्भय स्तम्भय जिह्वां कीलय – कीलय बुद्धिं विनाशय विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ।

ॐ ह्रीं ह्रीं हिली -हिली अमुकस्य (शत्रु का नाम लें) वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रुं जिह्वां कीलय शत्रुणां दृष्टि मुष्टि गति मति दंत तालु जिह्वां बंधय बंधय मारय मारय शोषय-शोषय हुं फट् स्वाहा ।।

विशेष:

इस पूरे प्रयोग में शत्रु के नाम की जगह यदि नाम ज्ञात न हो तो “गुप्त अलौकिक शत्रु” का उच्चारण करें।

निष्कर्ष:

माँ बगलामुखी की कृपा और ब्रह्मास्त्र मंत्र जैसे तांत्रिक प्रयोगों के माध्यम से व्यक्ति गहनतम और भयावह अलौकिक संकटों से भी मुक्त हो सकता है। श्रद्धा, निष्ठा और अनुशासनपूर्वक साधना करने से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली गूढ़ बाधाओं का समाधान पा सकता है। माँ पीताम्बरा के चरणों में बारम्बार नमन।

टी.डी. सिंह जी

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🔱  जय माँ बगलामुखी  🔱