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बगला गायत्री: माला की प्राण प्रतिष्ठा विधि

हल्दी की माला की प्राण प्रतिष्ठा विधि:

प्रारंभिक तैयारी:

  • स्नान कर किसी पवित्र स्थान पर आसन लगाकर शांतचित्त होकर बैठ जाएं।
  • एक पीतल के बर्तन में गाय के पंचगव्य को एकत्र करें।

पंचगव्य निर्माण विधि:

  • गाय का दूध – 50 ग्राम
  • गाय का दही – 50 ग्राम
  • गाय का घी – 50 ग्राम
  • गोमूत्र – 10 ग्राम
  • गाय का गोबर – 5 ग्राम

उपरोक्त सभी को एक पात्र में मिलाकर अच्छी तरह से मिश्रण करें। फिर इस पंचगव्य में हल्दी की नई माला (या जिस माला को सिद्ध करना हो) डाल दें।

मूल मंत्र जप: अब अपने दक्षिण हाथ की अंगुलियों से पात्र को ढककर निम्न मूल मंत्र का 108 बार जप करें:

मूल मंत्र: ऊँ ह्ल्रीं बगलामुखि सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पंदं स्तम्भय जिह्वांम् कीलय बुद्धिं विनाशय ह्ल्रीं ऊँ स्वाहा ।

दूध में स्नान और अभिमंत्रण: अब उस माला को गाय के दूध में डालें और उसी मूलमंत्र से पुनः 108 बार जप करें। इसके बाद, गंगा जल से माला को धोएं — प्रत्येक बार धोते हुए 36 बार मूलमंत्र जपें।

गुग्गुल धूपन और पंचामृत स्नान: माला को गंगाजल स्नान के बाद गुग्गुल से धूपित करें। फिर पंचामृत (गंगाजल, गाय का दूध, गोघृत, तुलसी पत्र, शर्करा) से स्नान कराएं। यह स्नान 36 या 108 बार मूलमंत्र के साथ करें।

प्राण प्रतिष्ठा की विधि: अब एक स्वच्छ कुश को मूलमंत्र से 36 बार गंगाजल द्वारा पवित्र करें। इसे चटाई या आसन पर रखें और माला को इस कुश से स्पर्श कराएं।

स्पर्श मंत्र: ओं हल्रीं हरिद्रा मालिकायै नमः

पूजा विधि और वंदना: मूलमंत्र द्वारा पंचोपचार पूजन करें, फिर माला की वंदना करें:

माला वंदना मंत्र:

ओं मां माले महामाये सर्व शक्ति स्वरूपिणी । चतुर्वर्ग त्वपि न्यस्तः तस्मान् में सिद्धिदा भव ।।

ओं अविघ्नं कुरु माले त्वं गृहणामि दक्षिणे करे । जप काले च सिद्धयर्थ प्रसीद मम सिद्धये ।।

ओं हरिद्रा मालाधिपतये सुशिव देहि देहि बगला ।।

मन्त्रार्थ: साघिनि साघरय साधय सर्व सिद्धि परिकल्पय परिकल्पय मे स्वाहा।।

अंतिम निवेदन: अब 108 बार मूलमंत्र का पुनः जप कर देवी को जप समर्पित करें।

जप निवेदन मंत्र: ओं गुह्यति गुह्य गोप्ती त्वं गृहाण स्यत् कृत जपं । सिद्धि भर्वतु में देवि त्वत्-प्रसादात् महेश्वरी ।

|| जय माँ बगलामुखी ||

टी.डी. सिंह जी

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🔱  जय माँ बगलामुखी  🔱