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Baglatd

प्राण प्रतिष्ठा- गूलर की लकड़ी पर

विनियोग – ॐ अस्य श्री प्राण प्रतिष्ठा मन्त्रस्य ब्रह्मा विष्णु रुद्रा ऋषयः ऋग्य जुसामानिच्छन्दासि, पराssख्या प्राण शक्ति देवता आं बीजं, ही शक्तिः, क्रों कीलकम् मम शत्रु ( …….) प्राण प्रतिष्ठापने विनियोगः । (जल भूमि पर डाल दे )

ऋष्यादि न्यास-

ॐ अंगुष्ठायो । 

ॐ आं ह्रीं क्रौं अं कं खं गं घं ड़ं आं ॐ हीं वाय वग्नि सलिल

पृथ्वी स्वरूपाददत्मने डंग प्रत्यंगयौः तर्जन्येश्च ।

ॐ आं ह्रीं क्रौं इं छं जं झं ञं ई परमात्य पर सुगन्धा ssत्मने शिरसे स्वाहा मध्यमयोश्च ।

ॐ आं ह्रीं क्रौं डं टं ठं डं ढं णं ॐ श्रोत्र त्व क्चक्षु-जिव्हा धाणाssत्यने शिखायै वषट् अनामिकयोश्च ।

ॐ आं ह्रीं क्रों एं

थंदं धं नं प्राणात्मने-कवचाय हुं कनिष्ठिकयोश्च।

ॐ आं ह्रीं क्रों पं फं बं भं मं वचना दान गमन विसर्गा नन्दाssत्मने औं नेत्र त्रयाय वौषट

ॐ आं ह्रीं क्रौ अं यं रं लं वं शं षं सं हं क्षं अः मनो बुद्धय हंकार चित्मssमने अस्त्राय फट् ।

इस प्रकार न्यास कर गूलर की लकड़ी पर बनाई गई आकृति के हृदय स्थान पर स्पर्श करते हुए यह मंत्र पढ़े-

ॐ आं ह्रीं क्रौ यं रं लं

ॐ आं ह्रीं क्रौ यं रं लं वं

ॐ आं ह्रीं क्रौ यं रं लं वं

शं षं सं हों हं सः बगलायः प्रणा इह प्राणाः ।

शं षं सं हों हं सः (शत्रु नाम) जीव इह स्थितः। 

शं षं सं हों हं सः (शत्रु नाम )


सर्वेन्द्रियाणि इह स्थितानि । ॐ आं ह्री क्रौ यं रं लं वं शं षं सं हों हंसः (शत्रु नाम) वाडमनश्चक्षु- श्रोत्र-धाण-प्राणा इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा ।

तदोपरान्त हवन प्रारम्भ कर इसे हवन कुड़ में रखे ।

शत्रु की क्रिया को उसी पर लौटाने हेतु हवन सामग्री – अपा मार्ग की समिधा हल्दी, सफेद सरसों का तिल, राई थोड़ा नमक आदि को प्रयोग करें ।

|| जय माँ बगलामुखी ||

टी.डी. सिंह जी

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🔱  जय माँ बगलामुखी  🔱